मजबूरी या बेबसी…

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Reported by : Pavan Sharma, Mathura

मजबूरी और एक पत्नी के लिए पति की क्या अहमियत है । ये देखने को मिला मथुरा में ।मथुरा कलेक्ट्रेट पर दिव्यांग पति को पीठ पर उठाकर ले जाती यह महिला है मथुरा की रहने वाली विमला । विमला के पति ट्रक ड्राइवर थे । लेकिन कुछ महीने पहले उनके पैर की नस बन्द हो गयी । जिसकी बजह से डॉक्टरों ने उनका एक पैर काटना पड़ा । सूरज की तपन और तेज गर्मी के बीच विमला अपने पति का दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाने के लिए कलेक्ट्रेट स्थित सीएमओ कार्यालय पहुँची । लेकिन यहां उनको फ़ोटो खिंचवाने के लिए कहा गया । लेकिन  दिव्यांग पति को ले जाने के लिए कोई ट्राय सायकल नहीं दी । जिसके बाद विमला ने अपने पति को पीठ पर उठाया और ले गईं फ़ोटो कराने दुकान पर । हालांकि विमला यह भी कहती है कि उन्होंने कभी ट्राई सायकल के लिए एप्लाई नहीं किया ।दिव्यांग पति और बेबस पत्नी को देख कलेक्ट्रेट पर मौजूद हर कोई व्यक्ति इनको देखता और निकल जाता । लेकिन अगर नजर किशी की नहीं पड़ी तो वह है नौकरशाही । इस बारे में जब जनपद के प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि इस तरह की तस्वीर सभ्य समाज के लिए दुःखद है ।

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