हाईवे निर्माण में देरी के लिए उत्तराखंड सरकार जिम्मेदार, PMO से की शिकायत

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हरिद्वार-देहरादून नेशनल हाईवे के दो साल से ठप पड़े चौड़ीकरण कार्य के लिए निर्माण एजेंसी ने राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इसकी तस्दीक राजमार्ग चौड़ीकरण की धीमी गति के मामले में एक पूर्व सैनिक की पीएमओ को की गई शिकायत से हुई है। एजेंसी का दावा है कि चौड़ीकरण में देरी की असल वजह राज्य सरकार की खनन नीति है।
ग्रामसभा प्रतीतनगर निवासी पूर्व सैनिक राजेश जुगलाण की शिकायत का प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है। शिकायत के जवाब में नेशनल हाईवे प्राधिकरण ने राजमार्ग निर्माण में देरी का कारण राज्य सरकार की खनन विरोधी नीति को माना है। जवाब में अनुबंधित निर्माण कंपनी का वित्तीय संसाधनों की कमी से जूझने का हवाला भी प्राधिकरण ने दिया है।

जुगलाण ने पीएमओ को भेजे गए अपने पत्र में निर्माणाधीन हाईवे की धीमी प्रगति व दो साल से जाम की समस्या और बढ़ती दुर्घटनाओं की शिकायत की थी। जिस पर एनएचएआई के परियोजना अधिकारी प्रदीप गुसाईं ने बताया कि निर्माण एजेंसी वित्तीय संसाधनों, प्रबंधन और उपकरणों की कमी से जूझ रही है। बताया कि मार्च में जिला प्रशासन ने बिना अनुमति के कंपनी के उप खनिज भंडारण और एजेंसी के निजी क्रेशर को सीज कर दिया। इससे भी निर्माण को पूरा करने में दिक्कतें हुई हैं।

खास बात यह है कि प्राधिकरण राजमार्ग निर्माण में विलंब का जो कारण बता रहा है, उस मामले में राज्य सरकार की ओर से एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई महज चार महीने पहले की गई है, जबकि हाईवे का निर्माण कार्य करीब दो साल से बाधित चल रहा है। जुगलाण ने बताया कि उन्होंने इस मामले में फिर से निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बाबत पीएमओ से शिकायत की जाएगी।

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