अवमानना मामला में नागेश्वर पर 1 लाख का जुर्माना, दिनभर कोर्ट में रहने की सजा

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बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम से जुड़े सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव की बिना शर्त माफी को शीर्ष अदालत ने नामंजूर करते हुए उन्हें 1 लाख रूपये जुर्माने के साथ-साथ कोर्ट की जबतक कार्यवाही चलेगी तबतक उन्हें पीछे बैठे रहना का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम की जांच टीम में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। अरुण शर्मा ही इस जांच टीम की अगुवाई करेंगे। नागेश्वर राव के अलावा एस. भसूरण पर भी एक लाख का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की सख्त टिप्पणियों के बाद अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि अगर आप नागेश्वर राव को कोई सजा सुनाते हैं, तो उनका करियर खराब हो सकता है। वह पिछले 32 साल से काम कर रहे हैं।

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की सीबीआई जांच में SC की अनुमति के बिना जांच टीम में शामिल किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। इसके बाद भी नागेश्वर राव ने जांच टीम के चीफ सीबीआई अधिकारी एके शर्मा का 17 जनवरी को सीबीआई से CRPF में तबादला कर दिया था। इसके बाद सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव ने बिना शर्त सुप्रीम कोर्ट से माफी मांग ली थी। उन्होंने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफीनामा दाखिल कर दिया था।

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