सामान्य वर्ग आरक्षण बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, बिल खारिज करने की मांग।

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सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के लिए नौकरियों और शिक्षा में दस फीसदी आरक्षण की व्यवस्था करने वाले संविधान संशोधन विधेयक को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई। गैर सरकारी संगठन यूथ फॉर इक्वेलिटी और कौशल कांत मिश्रा ने याचिका में इस विधेयक को निरस्त करने का अनुरोध करते हुए कहा, कि एकमात्र आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। बता दें कि याचिका में कहा गया है कि इस विधेयक से संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन होता है, क्योंकि सिर्फ सामान्य वर्ग तक ही आर्थिक आधार पर आरक्षण सीमित नहीं किया जा सकता है, और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा लांघी नहीं जा सकती। राज्यसभा ने बुधवार को 124वें संविधान संशोधन विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से पारित किया था। इससे पहले  मंगलवार को लोकसभा ने इसे 323 पारित किया था। गौरतलब है कि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिये आरक्षण का यह प्रावधान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गो को मिलने वाले 50 फीसदी आरक्षण से अलग है।

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