110 फीट गहरे गड्ढे में गिरी 3 साल कि सना को निकाल लिया गया

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बिहार के मुंगेर में मंगलवार को दोपहर करीब 3 बजे 3 साल की मासूम सना इस बोरवेल में गिरी और तब से ही पूरा का पूरा परिवार इस बोरवेल के पास और पड़ोसी घर के बाहर जमा हैं. प्रशासनिक अमले ने भी पूरी मुस्तैदी दिखाई और फौरन मौके पर पहुंच कर बोरवेल में ऑक्सिज़न पाइप पहुंचाई गई ताकि सना की सांसें चलती रहें. दवाइयां और पानी भी लगातार दिया जा रहा था हर साल ना जाने कितने ही बच्चे गड्ढों में जा गिरते हैं. लेकिन कुछ इन अंधेरे गड्ढों से बच कर निकल आते हैं. तो कुछ उसी में दम तोड़ देते हैं. दो- चार दिन शोर होता हैं. फिर हम सब भूल जाते हैं.तब तक जब तक कि अगला कोई गड्ढे में ना गिर जाए. और इस बार तीन साल की सना की बारी थी. सना ज़मीन के नीचे 110 फीट गहरे गड्ढे में थी. वो कई घंटों तक जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही.बस एक फीट चौड़ा घुप अंधेरा गड्ढ़ा और उस गड्ढ़े में 110 फीट नीचे फंसी उस मां की 3 साल की मासूम बच्ची. अंदर वो कभी डरती है. कभी घबराती है. कभी रोने लगती है. बार बार कहती जाती है. मम्मी प्लीज़ मुझे निकालो.यहां बहुत डर लग रहा है. वो मजबूर मां भी क्या करे. 110 फीट गहरे गड्ढ़े से अपने जिगर के टुकड़े को निकाले भी तो निकाले कैसे. शाम 5 बजे तक रेस्क्यू टीम 45 फीट वर्टिकल यानी सीधा गड्ढा और फिर हॉरिजेंटल यानी समानांतर गड्ढ़ा खोदकर सना के बिलकुल नज़दीक पहुंच चुकी थी. आखिरी वक्त में ज़्यादा वक्त इसलिए लगा क्योंकि जो समानांतर गड्ढा खोदा गया. उसमें एक वक्त में एक ही आदमी खुदाई का काम कर सकता था. यहां ज़्यादा गहरा गड्ढा खोदने की ना तो जगह थी और ना ही वक्त लिहाज़ा प्रशासन के हिसाब से ये सबसे बेहतर कोशिश थी.ये कोशिश रंग लाई. शाम होते-होते रेस्क्यू टीम सना से सात फीट की दूरी तक पहुंच जाती है. अब यहां से और एहतियात बरतने की जरूरत थी. काम धीमा हो जाता है. फिर आहिस्ता-आहिस्ता आखिरकार जिंदगी के दो हाथ सना के हाथों तक पहुंच जाते हैं. और करीबन 30 घंटे बाद सना को बचा लिया जाता है. और इस तरह से सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की कोशिश कामयाब हुई. सना की जिंदगी बचा ली गई.

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